Sunday, 4 August 2019

IMC July August Month New Offers 2019

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आ गये भारी बरसात वाले आफर?


Friday, 2 August 2019

सिर्फ 5 रुपए में मिलेगी डायबिटीज की बिना साइड इफेक्ट वाली आयुर्वेदिक दवा

 डायबिटीज की बिना साइड इफेक्ट वाली दवा

डायबिटीज रोगियों के लिए खुशखबरी है। राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान संस्थान 'एनबीआरआई' ने एक हर्बल औषधि तैयार की है, जिसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं।
    संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक एकेएस रावत ने बताया कि हमने टाइप-2 डायबिटीज रोयिगों के लिए एक दवा विकसित की है जो आयुर्वेद के सिद्धांत पर आधारित है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
    
उन्होंने बताया कि आम तौर पर एंटीजन शरीर के अंगों पर असर डालते हैं लेकिन हमारी औषधि में एंटी आक्सीडेंट है जो डायबीटीज रोगियों के लिए अच्छा है।
    
रावत ने बताया कि औषधि को विकसित करने की पहल एनबीआरआई के निदेशक सी एस नौटियाल ने की। औषधि को गोलियों के स्वरूप में दिया जाएगा।

इस आयुर्वेदिक औषधि का नाम 'बीजीआर-34' रखा गया है और इसकी 100 गोलियों की कीमत पांच सौ रूपए हो सकती है।
    
रावत ने कहा कि यदि लंबे समय तक ली जाए तो नई औषधि इंसुलिन पर निर्भरता को कम कर सकती है।
    
प्राकतिक औषधियों से तैयार ये दवाई सीएसआईआर की दो प्रयोगशालाओं एनबीआरआई और सेंट्रल इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांट सी-मैप ने विकसित की है। दोनों ही लखनऊ में हैं।
    
एनबीआरआई ने दिल्ली की एक फर्म को दवाई के वाणिज्यिक उत्पादन की अनुमति दी है। यही फर्म इसकी मार्केटिंग भी करेगी।
    
रावत ने बताया कि औषधि चार पौधों से बनी है, जिनका उल्लेख आयुर्वेद में है। यह औषधि पूरी तरह सुरक्षित है।
    
उन्होंने बताया कि जानवरों पर कराए गये परीक्षणों तथा संबद्ध वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला कि यह दवाई पूरी तरह सुरक्षित है और अचूक है। चिकित्सकीय परीक्षणों में 67 प्रतिशत की सफलता दर हासिल हुई है।

रावत ने बताया कि नई दवाई शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और एंटी आक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है।
    
उन्होंने कहा कि आम तौर पर लगातार एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल से गुर्दे, लीवर और हृदय पर असर पड़ता है लेकिन इस हर्बल औषधि से कोई नुकसान नहीं होगा।
    
उन्होंने कहा कि बाजार में कई डायबिटीज नियंत्रक हर्बल औषधियां हैं लेकिन बीजीआर-34 को वैज्ञानिकों ने प्रामाणिक बताया है।
    
इस दवाई से सामान्य रक्त ग्लूकोज स्तर बना रहेगा। अधिक ब्लड शुगर वाले मधुमेह रोगियों के लिए यह दवाई कारगर है और उन्हें सामान्य जीवन जीने में मदद करेगी।
    
रावत ने बताया कि 1971 से 2000 के बीच डायबिटीज रोगियों की संख्या दस गुना हो गई है। उन्होंने कहा अनुमान है कि 2011 के आंकडों के मुताबिक भारत में 20 से 79 साल की उम्र वाले 613 करोड़ डायबिटीज रोगी हैं। यह संख्या 2030 तक बढकर 1012 करोड़ होने की आशंका है।

होम हर्बल औषधियां संभल कर लें, तभी फायदा

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प्रकृति के खजाने से जो चीजें हमें मिली हैं, उनमें जड़ी-बूटियां भी हैं। पिछले कुछ सालों में इनकी लोकप्रियता में खासी वृद्धि हुई है। सेहत के लिए इनके तरह-तरह के इस्तेमाल से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों का खुलासा कर रही हैं वन्या
भले ही नीम जैसे पेड़ अब घरों में न दिखते हों, पर इनके औषधीय उपचारों ने हमारी जिंदगी में अहम जगह बना ली है। छोटी-बड़ी हर बीमारी की इलाज इनमें छिपा है। त्वचा की बीमारी हो या दांत का दर्द हर जगह ये कारगर हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में हर्बल और आयुर्वेदिक औषधियों की लोकप्रियता में काफी वृद्धि हुई है।
आयुर्वेद एक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद के सिद्धांत में माना जाता है कि कोई भी बीमारी शरीर के प्राण यानी पाए जाने वाले तत्व के असंतुलन के कारण होती है। आयुर्वेद के तीन तत्व हैं, वायु, पित्त और कफ। जब इन तीनों में से किसी में असुंतलन होता है तो इसे दोष कहा जाता है। वात यानी वायु या प्राण, पित्त यानी अग्नि या शरीर, कफ यानी जल या मस्तिष्क। कोई अच्छा वैद्य या आयुर्वेदाचार्य नाड़ी परीक्षण कर इन दोषों की ठीक प्रकार पहचान कर सकता है। जैसे यदि किसी व्यक्ति को वात की अधिकता है तो उसे चक्कर आएंगे, पित्त की अधिकता में सूजन होगी और कफ का असंतुलन पस या बलगम बनाता है।
आम धारणा है कि प्राकृतिक चिकित्सा, घरेलू चिकित्सा और आयुर्वेद एक ही है। लेकिन यह समझना होगा कि आयुर्वेद अपने आप में संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। भले ही आयुर्वेद में ऐलोपैथ की तरह साइड इफेक्ट के मामले ज्यादा न होते हों, लेकिन इसमें भी सावधानी रखना जरूरी होता है। प्रचार माध्यमों में कुछ जड़ी-बूटियों के नाम इतने ज्यादा प्रसारित-प्रकाशित होते हैं कि आम व्यक्तियों को याद हो जाते हैं। आजकल हर किसी को मालूम होता है कि दिमाग तेज चलाने के लिए ब्राह्मी, पेट के लिए हरड़ लाभकारी होती है, अब अगर किसी उत्पाद में दावा किया गया हो कि यह पदार्थ मौजूद है, तो कई बार व्यक्ति इसे तुरंत खरीद लेता है। वह किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से परामर्श करने की जहमत नहीं उठाता।
डॉ. दामोदर प्रसाद पारे कहते हैं कि आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार यदि कोई पौधा औषधीय महत्व का है तो इसका मतलब है कि उसकी जड़-फल-फूल-पत्ते-छाल का अलग-अलग महत्व होगा। जैसे कुछ दवाओं में जड़ कारगर होगी, तो हो सकता है उसी पौधे की छाल से बनाया गया क्वाथ अलग महत्व का हो। वह कहते हैं कि अगर आयुर्वेदिक दवाएं सही ढ़ंग से तैयार न की जाएं तो उनके प्रभाव में कमी आ सकती है। इसके अलावा आयुर्वेद दवाओं के साथ-साथ बिना चिकित्सक के परामर्श के ऐलोपैथी या अन्य उपचार किए जाएं, तो ये इतनी कारगर सिद्ध नहीं होती।
उपचार का असर दो व्यक्तियों पर अलग-अलग हो सकता है। आयुर्वेदिक दवाएं असर करने में भी लंबा समय लेती हैं। इन दवाओं के साइड अपेक्षाकृत कम होते हैं। फिर भी कोई आयुर्वेदिक दवा लेते वक्त चिकित्सक से परामर्श जरूर करना चाहिए। यह सुनिश्चित कर लें कि उसके पास बीएएमएस की डिग्री हो। दवा लेने के बाद उसमें क्या सामग्री है यह जरूर पूछें। अगर आपको कोई भी शक हो तो उसका परीक्षण करा लें, क्योंकि कुछ दवाओं में नुकसानदायक तत्व मौजूद होते हैं। जैसे कुछ दवाओं में पारा मिला होता है, जो बहुत नुकसानदायक हैं। इनके इस्तेमाल से शरीर के अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। यह सही है कि आमजन में उपयोगिता की दृष्टि से आयुर्वेदिक अधिक कारगर पद्धति है।
इन बातों का रखें ध्यान
च्यवनप्राश, अश्वगंधा, त्रिफला पाउडर आदि आयुर्वेदिक दवाएं खरीदते वक्त इस बात पर ध्यान दें कि डिब्बे पर सामग्री का नाम, मात्र, और वजन लिखा हो। साथ ही किस जड़ या पौधे से यह प्राप्त है इसकी जानकारी भी हो। हालांकि जड़ी-बूटियां प्राकृतिक होती हैं तो व्यक्ति मान कर चलता है कि यह सुरक्षित भी होंगी। लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता। 
निर्माता यह बताने को बाध्य नहीं है कि आहार संबंधी वस्तु सुरक्षित और लाभकारी है या नहीं। नियम तो यह है कि आपको पता हो कि दवा पर ठीक से शोध कर उसकी समीक्षा की गई हो। जैसे उसे पहले पशुओं पर परीक्षण कर फिर इंसान पर परीक्षण किया गया हो।
ज्यादातर विटामिन सप्लीमेंट यह सुनिश्चित नहीं करते कि ये शुद्ध है या नहीं या इसमें सामग्री की मात्रा कितनी है या जिस मुख्य पदार्थ से यह सप्लीमेंट बनाया गया है वह कितना है। यही वजह है कि यह शुद्ध नहीं होते। इसके अलावा मुख्य पदार्थ की मात्र भी हर सप्लीमेंट में अलग-अलग हो जाती है।
मानक रूप से प्रति गोली में मुख्य पदार्थ की मात्र का प्रतिशत साफ होना चाहिए, जबकि ज्यादातर हर्बल उत्पादों में सारे मिले-जुले पदार्थों की जानकारी होती है। इससे कोई भी व्यक्ति नहीं जान पाता कि मुख्य पदार्थ क्या है और सहायक पदार्थ कौन से हैं।
इन सभी कारणों को देखते हुए आपको चाहिए कि आप किसी अच्छी एवं नामी कंपनी का ही उत्पाद खरीदें। आहार या पोषक पदार्थों में पहले सामग्री की ठीक से जांच करें फिर उसे खरीदें।
अक्सर आपको यह दिक्कत आ सकती है कि कैसे पहचानें कि किस कंपनी की दवा असली या प्रामाणिक होगी और किसकी नहीं। यहां आप जीएमपी प्रमाणित कंपनी की दवा लें।
क्या हैं आसव और आरिष्ट
आयुर्वेद में दवा बनाने के आसव और अरिष्ट दो प्रमुख तरीके हैं। आसव से आश्य है जड़ी के आसवन (डिस्ट्रीलेशन) से तैयार दवा। अरिष्ट का मतलब है कि किसी भी जड़ी का एक चौथाई तैयार काढ़ा जिसे क्वाथ कहा जाता है। अरिष्ट बनाने के लिए प्राचीन पद्धति में क्वाथ को धान, महुआ या गुड़ के साथ लंबे समय रखा जाता था जिससे पगमेंटेशन के बाद अरिष्ट तैयार होता था, लेकिन अब इन्हें तैयार करने के लिए सीमेंट की बड़ी टंकियों का इस्तेमाल किया जाता है।
दवा वही, फार्मूले नये
त्रिकटु प्लस: पाचन क्रिया सुधारता है। सौंठ, काली मिर्च, हरा धनिया, जायफल और अजवायन से बनता है।
अश्वगंधा कंपाउंड: यह एनर्जी टॉनिक है। अश्वगंधा, शतावरी, कुडजू आदि से बनता है।
शतावरी कंपाउंड: महिलाओं के लिए उपयोगी होता है। यह शतावरी, केसर आदि से बनता है।
त्रिफला प्लस: हरीतकी, आमलकी, बिभितकी और अदरक से बनता है।
गोटूकोला कंपाउंड: दिमाग के लिए उपयोगी। गोटूकोला, अश्वगंधा, चंदन, मुलेठी से बना।
हर्बल फज: यह रक्त शोधक है। चंदन, लेमन ग्रास, सौंठ से बनता है।
अर्जुन कंपाउंड: यह हार्ट टॉनिक है। अर्जुन, अश्वगंधा, गुग्गुल और चंदन से बना।
हर्बल दर्दनाशक: यह गोटूकोला, जटामांसी, शंखपुष्पी, जायफल से बना।
सदियां बीतीं, जादू बरकरार
आंवला

इसे अमृतफल भी कहा जाता है। यह विटामिन सी को अच्छा स्नोत है। इसके सेवन से त्वचा रोगों में भी फायदा पहुंचाता है। यह कॉलेस्ट्रॉल कम करता है। मधुमेह रोग में भी काफी फायदा पहुंचाता है।
अश्वगंधा
अश्वगंधा के बीज, फल और छाल का कई रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। त्वचा रोगों में इसका इस्तेमाल लाभकारी होता है।
ब्राह्ही
इसके नियमित सेवन से याददाश्त में इजाफा होता है। कई मानसिक रोगों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
लहसुन
यह वातहर है। हृदय संबंधी समस्याओं में भी फायदा पहुंचाता है।
अदरक
पाचन तंत्र को बेहतर करता है। सर्दी-नजले जुकाम में फायदा पहुंचाता है। कॉलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखता है।
नीम
यह अनके रोगों में कारगर हैं। त्वचा रोगों में बहुत लाभ पहुंचाता है। इसका दांतुन करने से काफी फायदा पहुंचता है। यह रक्तशोधक और प्रभावशाली एंटीबायोटिक है।
त्रिफलायह पाचन क्रिया सुधारता है।
तुलसीसर्दी-जुकाम-खांसी एवं त्वचा रोगों में लाभकारी तुलसी के पांच पत्ते सादे पानी के साथ खाने से स्मरण शक्ति मजबूत होती है। रक्त शुद्धि में भी यह काफी उपयोगी है। तुलसी में थकान दूर करने के अद्भुत गुण हैं। पर संतानोत्पत्ति की चाह रखनेवाली महिलाएं इसके सेवन से बचें।

Thursday, 25 July 2019

अनदेखी की तो खतरनाक रूप ले सकती है पाइल्स की बीमारी, ये तरीके आएंगे काम

पाइल्स की बीमारी

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पाइल्स यानी बवासीर। इस स्थिति में बैठना भी मुश्किल हो जाता है। यह दो तरह की होती है और नजरअंदाज करने पर गंभीर रूप ले सकती है। जानें इसका इलाज और अन्य जरूरी बातें:

पाइल्स यानी बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसमें बैठना भी मुश्किल हो जाता है। मेडिकल भाषा में इसे हेमरॉइड्स कहा जाता है। इस बीमारी में गुदा (ऐनस) के अंदरूनी और बाहरी क्षेत्र और मलाशय (रेक्टम) के निचले हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से ऐनस के अंदर और बाहर या किसी एक जगह मस्से जैसी स्थिति बन जाती है, जो कभी अंदर रहते हैं और कभी बाहर भी आ जाते हैं। 

बवासीर दो तरह की होती है-खूनी बवासीर और बादी बवासीर। खूनी बवासीर (पाइल्स) में खून आता रहता है, लेकिन दर्द नहीं होता। जबकि बादी बवासीर में पेट में कब्ज बन जाती है और पेट हमेशा ही खराब रहता है। यह बीमारी 45 साल से 65 साल के लोगों में काफी आम है 


यहां कुछ घरेलू तरीके बताए जा रहे हैं, जो पाइल्स की समस्या से निपटने में मदद कर सकते हैं: 

एलो वेरा 
एलो वेरा में कई समस्याओं का इलाज छिपा है। यह सिर्फ स्किन को सॉफ्ट और स्पॉटलेस बनाने के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि पाइल्स की बीमारी में भी यह काफी आराम देता है। हालांकि पाइल्स के लिए फ्रेश एलो वेरा जैल यानी एलो वेरा की पत्ती से तुरंत निकाला गया जैल यूज करना चाहिए। इस जैल को पाइल्स वाले हिस्से में बाहर की तरफ लगाएं। दिन में कम से 2-3 बार इस जैल को लगाएं। 

(ध्यान रखें: कुछ लोगों को एलो वेरा से एलर्जी होती है। ऐसे लोग एलो वेरा का इस्तेमाल डॉक्टर से पूछकर करें। नहीं तो स्किन के किसी हिस्से पर लगाकर देख लें कि कहीं दर्द या झनझनाहट तो नहीं हो रही। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर एलो वेरा को पाइल्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।) 

आइस पैक 
आइस पैक को भी पाइल्स की बीमारी में काफी लाभदायक माना गया है। प्रभावित हिस्से पर आइस पैक से सिकाई करें। चाहे तो बर्फ के टुकड़े लेकर उन्हें एक कपड़े में लपेट लें और फिर प्रभावित हिस्से पर लगाएं। रोजाना 5 से 10 मिनट इस तरह सिकाई करने से पाइल्स की समस्या में आराम मिलेगा। 

हॉट वॉटर बाथ 
हॉट वॉटर बाथ यानी गरम पानी में नहाने से भी बवासीर यानी पाइल्स में राहत मिलती है। इससे सूजन और खुजली कम हो जाती है। इसके अलावा नारियल का तेल भी फायदा पहुंचाता है। प्रभावित हिस्से पर नारियल तेल लगाने से सूजन और खुजली कम हो जाती है। 

इन नुस्खों के अलावा अपने रूटीन और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके भी पाइल्स की बीमारी से बचा जा सकता है। जैसे कि: 

-रोजाना भरपूर मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं। 
-फाइबर से भरपूर खाना खाएं। फाइबर हमारे पाचन सिस्टम के लिए बेहद जरूरी होता है और बाउल मूवमेंट में भी मदद करता है। इसके अलावा फाइबर मल को भी सॉफ्ट बनाने में हेल्प करते हैं ताकि वह आसानी से शरीर से बाहर निकल पाए। 
-हल्के और ढीले-ढाले कपड़े पहनें और प्राइवेट हिस्से की नियमित तौर पर सफाई करें। 

(नोट: पाइल्स की समस्या होने पर किसी भी तरह की लापरवाही न करें और सिर्फ घरेलू नुस्खों के भरोसे ही न रहें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और इलाज कराएं। नहीं तो यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है।) 

पाइल्स या बवासीर का इलाज 
बात करें पाइल्स के इलाज की, तो इसके लिए कई तरीके उपलब्ध हैं। जैसे कि: 
1- दवाई के जरिए भी पाइल्स का इलाज किया जा सकता है लेकिन वह भी तब जब पाइल्स स्टेज 1 या 2 का हो। ऐसे में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। एनोवेट और फकटू पाइल्स पर लगाने की दवाएं हैं। इनमें से कोई एक दवा दिन में तीन बार पाइल्स पर लगाई जा सकती है। इन दवाओं को डॉक्टर से पूछकर ही लगाना चाहिए। 

2- अगर मस्से थोड़े बड़े हैं तो रबर बैंड लीगेशन का प्रयोग किया जाता है। इसमें मस्सों की जड़ पर एक या दो रबर बैंड को बांध दिया जाता है, जिससे उनमें ब्लड का प्रवाह रुक जाता है। इसमें डॉक्टर एनस के भीतर एक डिवाइस डालते हैं और उसकी मदद से रबर बैंड को मस्सों की जड़ में बांध दिया जाता है। इसके बाद एक हफ्ते के समय में ये पाइल्स के मस्से सूखकर खत्म हो जाते हैं। 

3- इस तरीके का इस्तेमाल तभी किया जाता है जब मस्से छोटे होते हैं। स्टेज 1 या 2 तक इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मरीज को एक इंजेक्शन दिया जाता है। इससे मस्से सिकुड़ जाते हैं और उसके बाद धीरे-धीरे शरीर के द्वारा ही अब्जॉर्ब कर लिए जाते हैं। अगर मस्से बाहर आकर लटक गए हैं तो इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जाता। 

4- मस्से अगर बहुत बड़े हैं और दूसरे तरीके फेल हो चुके हैं तो हेमरॉयरडक्टमी की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह सर्जरी का परंपरागत तरीका है। इसमें अंदर के या बाहर के मस्सों को काटकर निकाल दिया जाता है। 

5- स्टेज 3 या 4 के पाइल्स के लिए ही इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है। बाहर निकले हुए मस्से को एक सर्जिकल स्टेपल के जरिये वापस अंदर की ओर भेज दिया जाता है और ब्लड सप्लाई को रोक दिया जाता है जिससे टिशू सिकुड़ जाते हैं और बॉडी उन्हें अब्जॉर्ब कर लेती है। 


Sunday, 30 June 2019

राइस ब्रान आयल

राइस ब्रान आयल फायदे उपयोग  

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राइस ब्रान आयल जो चावल की भूसी से तैयार किया जाता है। अनेक स्वास्थ्य लाभों से भरा होता है इस तेल में फैट नहीं होता। सामान्‍यतया घरों में खाना बनाने के लिएसोयाबीन या सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता है। लेकिन अगर उनकी जगह राइस ब्रैन ऑयल का उपयोग किया जाये तो ये अधिक फायदेमंद माना जाता है। बजार में मिलने बाले अधिकतर तेलों की गुणवत्‍ता भरोसेमंद नहीं होती, ऐसे में राइस ब्रान ऑयल एक अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है। आइये जानते है चावल की भूसी के तेल यानि राइस ब्रान आयल फायदे उपयोग और नुकसान के बारें में।


राइस ब्रान आयल के फायदे वजन कम करने में 


जैसा कि आप जानते है कि राइस ब्रान आयल को चावल की भूसी से निकाला जाता हैं। चावल के छिलकों से निकाला होने के कारण इस तेल में फैट की मात्रा न के बराबर होती है। और इसमें पाया जाने वाला ओरिज़ॉनल एक बेहद लाभदयाक तत्व होता है। जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में हमारी मदद करता है राइस ब्रैन ऑयल में ट्रांस फैटी एसिड भी नहीं होता, जो मोटापा बढ़ने का सबसे अहम कारण होता है। इस तेल के इस्तेमाल से आप अपना वजन कम करने के लिए मन पसंद का खाना खा सकते है।


राइस ब्रान आयल बालों का झड़ना करे कम

चावल की भूसी के तेल में मौजूद इस तेल में फेरुलिक एसिड और ईस्टर्स होते हैं जो कि बालों की ग्रोथ के लिये जरूरी होते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन ई, ओमेगा 3 और ओमेगा 6 पाए जाते हैं, जो कि बालों को सफेद होने से बचाते हैं और उन्हें स्वस्थ बनाए रखते हैं। राइस ब्रान ऑइल का बना हुआ खाना खाकर आप अपने बालों का गिरना कम कर सकते है।



चावल की भूसी का तेल स्वास्थ्य त्वचा के लिए


राइस ब्रैन ऑइल में विटामिन ई होता है जो झुर्रियां कम करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है जिससे आप अपने उम्र से अधिक जवां दिखते हैं। यह सूरज की किरणों (Sun rays) के कारण होने वाली समस्‍या को दूर करता है और स्‍किन टोन बनाए रखने में मदद करता है। जिससे आप अपने उम्र से अधिक जवां दिखते हैं।


राइस ब्रान आयल के फायदे कोलेस्ट्रोल नियंत्रण में


दुसरे खाद्य तेलों की तुलना में राइस ब्रान तेल में मोनोअनसेचुरेटेड, पॉलीअनसेचुरेटेड तथा संतृप्त वसा की मात्रा बहुत अधिक पाईं जाती हैं। राइसब्रान खाद्यतेल इन सभी वसायुक्त तत्वों का बहुत ही बढिया स्रोत है। Rice bran Oil में इन तीनों fatty acids का समावेश होने की वजह से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है जिसकी वजह से दिल के दौरे और स्ट्रोक को कम करने में मदद मिलती है

राइस ब्रान आयल है लिवर के लिये फायदेमंद – 

राइस ब्रैन ऑयल में लीवर को मजबूती प्रदान करने वाले विटामिनस और प्रोटीन का समावेश होता है, जिससे लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ने में मदद मिलती है। यह एग्जिमा और फैटी लीवर रोग को भी ठीक करने में सहायक है।


राइस ब्रैनऑयल बनाएं इम्यून सिस्टम मजबूत – 

इस तेल में एंटीऑक्‍सीडेंट प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाता है। इस तेल से बना हुआ खाना खाने से शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को बेहद लाभ पहुचता है। इस तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर में उपस्थित फ्री रेडीकल्स से लड़ता है और कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता शरीर में बढ़ाता है।


राइस ब्रान आयल रोके कैंसर होने से –


राइस ब्रैन ऑयल में टोकोफेरोल्स (Tocopherols) एंड टोकोट्रीएनल (Tocotrianal) नामक पदार्थ हेाते हैं,जो फ्री रैडिकल्स से होने वाले कैंसर को रोकते है। फ्री रेडिकल्स सेलुलर चयापचय के खतरनाक उप-उत्पाद हैं जो कि स्वस्थ कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदल देते हैं। इसलिए कैंसर की संभावना नजर आये तो यह तेल जरूर अपनाएं।..


एलर्जिक तत्वों से रक्षा करता है राइस ब्रान आयल –


राइस ब्रान तेल हमारे शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण होने से सुरक्षित करता है। यह शरीर को एलर्जिक तत्वों के विरुद्ध शक्तिशाली बनाकर उनसे लड़ने की शक्ति देता है।

एलर्जी लक्षण, बचाव के तरीके और घरेलू उपचार – 
Allergy symptoms, Causes and Home treatment in Hindi
Allergy in Hindi एलर्जी तब होती है जब हमारा सरीर किसी पदार्थ के प्रति प्रतिक्रिया करता है |यह मामूली से कठिन समस्या हो सकती है |एलर्जी के बिभिन्य प्रकार होते है | इस लेख में आप जानेगे एलर्जी लक्षण, बचाव के तरीके और घरेलू उपचार के बारे में।

सबसे आम एलर्जीयां इन चीजो से होती है:

  • हवा मे मोजूद चीजे जैसे फूलो का पराग, मिटटी, पालतू पशुओं की रुसी या धूल
  • वे चीजे जिन्हें आप छूते है जैसे धातु वनस्पति दूध या रसायन
  • आप जो कुछ खाते या पीते है जैसे अंडे, मुगफली, मेवा, दूध, सोया,गेहूं या शंख मीन
  • कीड़ो के डंक, जैसे बर्र, मधुमख्की, ततैया, चीते के डंक
  • दवाएं
एलर्जी से मुक्ति नहीं मिल सकती, लेकिन इलाज से आप वेहतर महसूस कर सकते है| सबसे अच्छी योजना यह होगी की उन चीजों से बचा जाये जो आपके लक्षण को और बुरा बनाती है

एलर्जी के लक्षण क्या हैं – Symptoms Of Allergy In Hindi

allergy/एलर्जी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। एलर्जन से संपर्क की मात्रा, क्षमता और पीड़ित व्यक्ति की रोग प्रतिकार शक्ति के अनुसार यह लक्षण कम-ज्यादा हो सकते हैं।
सामान्य तौर पर देखे जानेवाले एलर्जी के लक्षणों जानकारी निचे दी गयी हैं :
1. नाक में एलर्जी – बार-बार जुखाम होना, नाक से पानी बहना या नाक कफ से जाम हो जाना, खुजली आना, छींके आना इत्यादि।
2.त्वचा मेंएलर्जी – खुजली होना, त्वचा पर लाल चट्टे, खुजली करने पर चट्टे पड़कर सूजन आना इत्यादि।
3.आँख मेंएलर्जी – आँखों में से पानी आना, खुजली होना, आँखे लाल होना इत्यादि।
4.फेफड़ो में एलर्जी – सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में कफ जम जाना, सांस लेते समय सिटी जैसा आवाज आना, घबराहट इत्यादि।
5.आहार और एलर्जी –कुछ लोगो को आहार पदार्थों से एलर्जी होती है जैसे की टमाटर, खीरा, दूध, अंडा या मछली इत्यादि। ऐसा आहार लेने पर अगर एलर्जी होती है तो गैस, उलटी, पेट दर्द, खुजली, जुलाब, त्वचा पर लाल चट्टे जैसे लक्षण नजर आते हैं।
6.सम्पूर्ण शरीर में एलर्जी –कभी-कभी किसी विशेष एलर्जन के संपर्क में आने पर अतिसंवेदन शीलता के कारण सम्पूर्ण शरीर में एलर्जी होकर घबराहट, सांस लेने में तकलीफ, चेहरे पर सूजन, खुजली जैसे लक्षण नजर आते है और पीड़ित को गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ता हैं।
7.दवा से एलर्जी –दवा से एलर्जी होने पर पीड़ित की हालत बेहद ख़राब हो सकती है और तुरंत हॉस्पिटल में दाखिल कर उपचार कराना पड़ता हैं।

एलर्जी का निदान कैसे किया जाता हैं – 

How to diagnose allergy in Hindi

ज्यादातर मामलों में एलर्जी का निदान पीड़ित की शारीरिक जांच, लक्षण और एलर्जी का इतहास  देखकर ही निदान हो जाता हैं। कुछ मामलों में अगर पीड़ित को पता नहीं चलता है की उसे किस चीज से एलर्जी हो रही हैं तो ऐसी अवस्था में पीड़ित की रक्त जांच / Blood Test की जाती हैं। रक्त जांच में शाकाहारी आहार, मांसाहारी आहार, दवा, वनस्पति, परागकण और किटक(insect) के प्रति संवेदन शीलता की जांच की जाती हैं।
रक्त जांच का रिपोर्ट आने पर जिस चीज के प्रति अतिसंवेदन शीलता पायी जाती है उस चीज से दुरी बनाने की सलाह दी जाती हैं। एलर्जी को सामान्य मानकर दुर्लक्षित करना बेहद खतरनाक हो सकता है। अगर आपको एलर्जी की समस्या है तो उसे कम करने के लिए उपाय करने चाहिए।

एलर्जी के बचाव के तरीके – Ways to Protect Allergy in Hindi

  1. सबसे पहले तो जो सामान्य चीज़े आप कर सकते है वो है घर में पालतू पशुओ और जानवरों के करीब जाने से बचे अगर आपको उनके बालों से एलर्जी ( Allergy)  है और उसके बाद घर को साफ़ सुथरा रखने के साथ साथ उपयुक्त कीटनाशकों का भी प्रयोग करें ताकि कचरे वाले मछर पैदा नहीं हो |
  2. घर में वूलन का कारपेट इस्तेमाल नहीं करें और teddybear या अन्य soft toys को साफ़ रखें  |
  3. एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं l
  4. वूलन के blanket के बजाय बाजार में मौजूद ‘एक्रिलिक’ रजाई और सिंथेटिक तकियों का इस्तेमाल करे |
  5. बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे,आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा  लगायें
  6. पालतू पशुओं को अपने लिविंग रूम से दूर ही रखें |
  7. जानवरों और पालतू पशुओं के बारे में ध्यान रखे कि उन्हें नियमित रूप से नहलाएं और उनके बाल अधिक बड़े नहीं होने दें क्योंकि उनके बालों में धुल मिटटी फंस जाने के कारण अगर आप उनके सम्पर्क में आते है तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है |
  8. घर में proper ventilation की व्यवस्था रखें |
  9. अपनी कबर्ड में सूखे और साफ़ कपडे ही रखें क्योंकि मैले या नम कपड़ों से फफूंद की समस्या हो सकती है इसलिए इसका ध्यान रखें |
  10. ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे l
  11. जब आप एलर्जी ( Allergy) के लिए टेस्ट करवा लेते है तो एक बार एलर्जी (Allergy) के कारक चिन्हित हो जाने की दशा में खानपान का विशेष ध्यान रखें अगर आप बाजार से कोई चीज़ खरीद कर खाते है पीते है तो उस पर उसमे मौजूद तत्व अंकित होते है इसलिए एक बार उनका ध्यान रखकर ही कोई चीज़ खाएं |

एलर्जी से बचाव के घरेलू उपाय – 

home remedies for Allergy Treatment in Hindi

1.नाक की एलर्जी -जिन लोगों को नाक की एलर्जी बार बार होती है उन्हें सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ समय तक लगातार लेना चाहिए इससे नाक की एलर्जी में आराम आता है ,सर्दी में घर पर बनाया हुआ या किसी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश खाना भी नासिका एवं साँस की एलर्जी से बचने में सहायता करता है आयुर्वेद की दवा सितोपलादि पाउडर एवं गिलोय पाउडर को 1-1 ग्राम की मात्रा   में सुबह शाम भूखे पेट शहद के साथ कुछ समय तक लगातार लेना भी नाक एवं श्वसन संस्थान की एलर्जी में बहुत आराम देता है
2.पानी में ताजा अदरक, सोंफ एवं पौदीना उबालकर उसे गुनगुना होने पर पीयें।, इसे आप दिन में 2-3 बार पी सकते हैं।
3.चार पत्ते तुलसी, अदरक, मिश्री, लोंग, कालीमिर्च मिलकर बनाई हुई हर्वल चाय पीने से एलर्जी मे आराम मिलता है|
4.सर्दियो मे चवनप्रास खाने से नाक और सास की एलर्जी दूर होती है|

स्किन एलर्जी से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपचार – 

home remedies for getting rid of skin allergies

ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं: पानी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है। स्किन allergy से बचने के लिए सबसे सस्ता उपाय है पानी। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर की गंदगी यूरिन के साथ बाहर निकल जाती है।
सुबह की धूप लें: सुबह की धूप त्वचा के लिए कई मायनों फायदेमंद होती है। त्वचा में allergy और फंगस जैसी समस्या सूर्य के प्रकाश से दूर होती हैं। सुबह 20 मिनट की धूप लेने की आदत बनाएं।
कॉड लिवर ऑयल व विटामिन ई: विटामिन ई ऑयल में कॉड लिवर ऑयल मिलाकर एलर्जी वाली जगह पर लगाएं और रात भर छोड़ दें। सुबह तक रैशेज में आराम मिल जाएगा।
तुलसी पत्ते का पैक: तुलसी पत्ते को पीस लें। इसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल, लहसुन की दो कलियां, एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं। इसे allergy वाली जगह पर लगाएं और थोड़ी देर बाद साफ कर लें।
नीम: एंटी बैक्टीरियल गुण का कारण स्किन की हर तरह की समस्या के निदान में नीम बहुत फायदेमंद है। एलर्जी को दूर करने के लिए नीम की पत्तियों को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगो कर पीस लें। इसको त्वचा पर लगा कर 30 मिनट तक लगाने के बाद धो लें। इसके अलावा नीम की पत्ती को पानी में उबालकर नहाने से भी फायदा मिलता है।
नीम: जिन्हे  बार बार त्वचा की allergy होती है उन्हें मार्च अप्रेल के महीने में जब नीम के पेड़ पर कच्ची कोंपलें आ रही हों उस समय 5-7 कोंपलें 2-3 कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह चबा चबा कर 15-20 दिन तक खाना  त्वचा के रोगों से बचाता है,
हल्दी: से बनी आयुर्वेद की दवा हरिद्रा खंड भी त्वचा के  रोगों में बहुत गुणकारी है इसे किसी आयुर्वेद चिकित्सक की राय से सेवन कर सकते हैं l
पपीता: पपीते में मौजूद एन्जाइम स्किन एलर्जी को दूर करने में भी मददगार होता है। allergy होने पर पपीते के गूदे को मसलकर चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट लगा रहने के बाद धो दें।

ऐसे करें एलर्जी से बचाव

  1. घर से निकलने से पहले त्वचा को अच्छी तरह ढंक लें। धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लोशन जरूर लगाएं।
  2. बाहर से आकर चेहरे को पानी से जरूर धोएं। फेसवॉश का ज्यादा इस्तेमाल न करें इससे त्वचा शुष्क होती है।
  3. जिन चीजों से एलर्जी हो उन्हें खाने से बचें। कुछ खाद्य पदार्थ एक साथ खाने से भी एलर्जी हो जाती है।
  4. फिल्टर्ड पानी का ही प्रयोग करें।
अगर इन सब तरीको को आजमाने के बाद भी यदि आपको कोई प्रश्न या चिंता हो तो अपने डॉक्टर से बात करे |

राइस ब्रान आयल दिलाये मासिक धर्म के दर्द में राहत  
महिलाओ के लिए इस चावल की भूसी के तेल के फायदे मासिक धर्म में दर्द से राहत पाने के लिए खास मने जाते है इस तेल को खाने से उनमें रक्तस्राव की मात्रा काफी कमी आती हैं तथा पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को  भी कम करने में काफी सहायता मिलती है।
राइस ब्रान आयल के नुकसान-  
  1. अत्यधिक इस्तेमालकरने से बचें: राइस ब्रैन ऑयल लगभग हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना हो सकता है आपके शरीर के लिए नुकसानदेय।
  2. इन परेशानियों में इसका सेवन ना करें: चावल की भूसी के तेल में फाइबर अधिक मात्रा में होता है जो पाचन में सुधार कर सकता है। लेकिन यदि आपको जठरांत्र से संबंधी कोई समस्या है या आप पहले से ही अल्सर जैसी कोई बीमारी से पीड़ित हैं या फिर किसी भी अन्य कारण से आपके पाचन तंत्र संकुचित होता है तो यह आपकी समस्या को और बढ़ा सकता है।
  3. सीधा सेवन करने से बचें: इसके अलावा चावल की भूसी के तेल में कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में होती हैं। इसलिए खाना पकाने में जितनी जरूरत हो उतना ही इसका उपयोग करें। इसका अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपके शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है।
ऊपर अपने जाना की किस प्रकार राइस ब्रान आयल यानि चावल की भूसी के तेल हमारे लिए कितना लाभदय होता है तो आज से ही इसे अपने खाने बनाने के तेल में सामिल करें और लाभ प्राप्त करें |

Saturday, 29 June 2019

क्या सचमुच सैनिटरी नैपकिन से हो सकता है कैंसर? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

थोड़ा सावधान हो जाएं क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि सैनिटरी नैपकिन के लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से कैंसर हो सकता है.

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  ओमेगा 3-6-9 Omega 3-6-9 उपयोग करने के फायदे:- 1. आई.एम.सी ओमेगा 3-6-9 के अनेक लाभ हैं और यह स्वास्थ्य के अनुकूल है।  2. यह ओमेगा फैटी एसिड...