Thursday, 25 July 2019

अनदेखी की तो खतरनाक रूप ले सकती है पाइल्स की बीमारी, ये तरीके आएंगे काम

पाइल्स की बीमारी

SANA IMC HERBAL

SAMTA NAGAR, TIMKI, TIN KHAMB CHOUK, NAGPUR,  9503593007, 7620187007

पाइल्स यानी बवासीर। इस स्थिति में बैठना भी मुश्किल हो जाता है। यह दो तरह की होती है और नजरअंदाज करने पर गंभीर रूप ले सकती है। जानें इसका इलाज और अन्य जरूरी बातें:

पाइल्स यानी बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसमें बैठना भी मुश्किल हो जाता है। मेडिकल भाषा में इसे हेमरॉइड्स कहा जाता है। इस बीमारी में गुदा (ऐनस) के अंदरूनी और बाहरी क्षेत्र और मलाशय (रेक्टम) के निचले हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से ऐनस के अंदर और बाहर या किसी एक जगह मस्से जैसी स्थिति बन जाती है, जो कभी अंदर रहते हैं और कभी बाहर भी आ जाते हैं। 

बवासीर दो तरह की होती है-खूनी बवासीर और बादी बवासीर। खूनी बवासीर (पाइल्स) में खून आता रहता है, लेकिन दर्द नहीं होता। जबकि बादी बवासीर में पेट में कब्ज बन जाती है और पेट हमेशा ही खराब रहता है। यह बीमारी 45 साल से 65 साल के लोगों में काफी आम है 


यहां कुछ घरेलू तरीके बताए जा रहे हैं, जो पाइल्स की समस्या से निपटने में मदद कर सकते हैं: 

एलो वेरा 
एलो वेरा में कई समस्याओं का इलाज छिपा है। यह सिर्फ स्किन को सॉफ्ट और स्पॉटलेस बनाने के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि पाइल्स की बीमारी में भी यह काफी आराम देता है। हालांकि पाइल्स के लिए फ्रेश एलो वेरा जैल यानी एलो वेरा की पत्ती से तुरंत निकाला गया जैल यूज करना चाहिए। इस जैल को पाइल्स वाले हिस्से में बाहर की तरफ लगाएं। दिन में कम से 2-3 बार इस जैल को लगाएं। 

(ध्यान रखें: कुछ लोगों को एलो वेरा से एलर्जी होती है। ऐसे लोग एलो वेरा का इस्तेमाल डॉक्टर से पूछकर करें। नहीं तो स्किन के किसी हिस्से पर लगाकर देख लें कि कहीं दर्द या झनझनाहट तो नहीं हो रही। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर एलो वेरा को पाइल्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।) 

आइस पैक 
आइस पैक को भी पाइल्स की बीमारी में काफी लाभदायक माना गया है। प्रभावित हिस्से पर आइस पैक से सिकाई करें। चाहे तो बर्फ के टुकड़े लेकर उन्हें एक कपड़े में लपेट लें और फिर प्रभावित हिस्से पर लगाएं। रोजाना 5 से 10 मिनट इस तरह सिकाई करने से पाइल्स की समस्या में आराम मिलेगा। 

हॉट वॉटर बाथ 
हॉट वॉटर बाथ यानी गरम पानी में नहाने से भी बवासीर यानी पाइल्स में राहत मिलती है। इससे सूजन और खुजली कम हो जाती है। इसके अलावा नारियल का तेल भी फायदा पहुंचाता है। प्रभावित हिस्से पर नारियल तेल लगाने से सूजन और खुजली कम हो जाती है। 

इन नुस्खों के अलावा अपने रूटीन और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके भी पाइल्स की बीमारी से बचा जा सकता है। जैसे कि: 

-रोजाना भरपूर मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं। 
-फाइबर से भरपूर खाना खाएं। फाइबर हमारे पाचन सिस्टम के लिए बेहद जरूरी होता है और बाउल मूवमेंट में भी मदद करता है। इसके अलावा फाइबर मल को भी सॉफ्ट बनाने में हेल्प करते हैं ताकि वह आसानी से शरीर से बाहर निकल पाए। 
-हल्के और ढीले-ढाले कपड़े पहनें और प्राइवेट हिस्से की नियमित तौर पर सफाई करें। 

(नोट: पाइल्स की समस्या होने पर किसी भी तरह की लापरवाही न करें और सिर्फ घरेलू नुस्खों के भरोसे ही न रहें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और इलाज कराएं। नहीं तो यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है।) 

पाइल्स या बवासीर का इलाज 
बात करें पाइल्स के इलाज की, तो इसके लिए कई तरीके उपलब्ध हैं। जैसे कि: 
1- दवाई के जरिए भी पाइल्स का इलाज किया जा सकता है लेकिन वह भी तब जब पाइल्स स्टेज 1 या 2 का हो। ऐसे में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। एनोवेट और फकटू पाइल्स पर लगाने की दवाएं हैं। इनमें से कोई एक दवा दिन में तीन बार पाइल्स पर लगाई जा सकती है। इन दवाओं को डॉक्टर से पूछकर ही लगाना चाहिए। 

2- अगर मस्से थोड़े बड़े हैं तो रबर बैंड लीगेशन का प्रयोग किया जाता है। इसमें मस्सों की जड़ पर एक या दो रबर बैंड को बांध दिया जाता है, जिससे उनमें ब्लड का प्रवाह रुक जाता है। इसमें डॉक्टर एनस के भीतर एक डिवाइस डालते हैं और उसकी मदद से रबर बैंड को मस्सों की जड़ में बांध दिया जाता है। इसके बाद एक हफ्ते के समय में ये पाइल्स के मस्से सूखकर खत्म हो जाते हैं। 

3- इस तरीके का इस्तेमाल तभी किया जाता है जब मस्से छोटे होते हैं। स्टेज 1 या 2 तक इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मरीज को एक इंजेक्शन दिया जाता है। इससे मस्से सिकुड़ जाते हैं और उसके बाद धीरे-धीरे शरीर के द्वारा ही अब्जॉर्ब कर लिए जाते हैं। अगर मस्से बाहर आकर लटक गए हैं तो इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जाता। 

4- मस्से अगर बहुत बड़े हैं और दूसरे तरीके फेल हो चुके हैं तो हेमरॉयरडक्टमी की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह सर्जरी का परंपरागत तरीका है। इसमें अंदर के या बाहर के मस्सों को काटकर निकाल दिया जाता है। 

5- स्टेज 3 या 4 के पाइल्स के लिए ही इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है। बाहर निकले हुए मस्से को एक सर्जिकल स्टेपल के जरिये वापस अंदर की ओर भेज दिया जाता है और ब्लड सप्लाई को रोक दिया जाता है जिससे टिशू सिकुड़ जाते हैं और बॉडी उन्हें अब्जॉर्ब कर लेती है। 


Sunday, 30 June 2019

राइस ब्रान आयल

राइस ब्रान आयल फायदे उपयोग  

SANA IMC HERBAL

SAMTA NAGAR, TIMKI, TIN KHAMB CHOUK, NAGPUR,  9503593007, 7620187007

राइस ब्रान आयल जो चावल की भूसी से तैयार किया जाता है। अनेक स्वास्थ्य लाभों से भरा होता है इस तेल में फैट नहीं होता। सामान्‍यतया घरों में खाना बनाने के लिएसोयाबीन या सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता है। लेकिन अगर उनकी जगह राइस ब्रैन ऑयल का उपयोग किया जाये तो ये अधिक फायदेमंद माना जाता है। बजार में मिलने बाले अधिकतर तेलों की गुणवत्‍ता भरोसेमंद नहीं होती, ऐसे में राइस ब्रान ऑयल एक अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है। आइये जानते है चावल की भूसी के तेल यानि राइस ब्रान आयल फायदे उपयोग और नुकसान के बारें में।


राइस ब्रान आयल के फायदे वजन कम करने में 


जैसा कि आप जानते है कि राइस ब्रान आयल को चावल की भूसी से निकाला जाता हैं। चावल के छिलकों से निकाला होने के कारण इस तेल में फैट की मात्रा न के बराबर होती है। और इसमें पाया जाने वाला ओरिज़ॉनल एक बेहद लाभदयाक तत्व होता है। जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में हमारी मदद करता है राइस ब्रैन ऑयल में ट्रांस फैटी एसिड भी नहीं होता, जो मोटापा बढ़ने का सबसे अहम कारण होता है। इस तेल के इस्तेमाल से आप अपना वजन कम करने के लिए मन पसंद का खाना खा सकते है।


राइस ब्रान आयल बालों का झड़ना करे कम

चावल की भूसी के तेल में मौजूद इस तेल में फेरुलिक एसिड और ईस्टर्स होते हैं जो कि बालों की ग्रोथ के लिये जरूरी होते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन ई, ओमेगा 3 और ओमेगा 6 पाए जाते हैं, जो कि बालों को सफेद होने से बचाते हैं और उन्हें स्वस्थ बनाए रखते हैं। राइस ब्रान ऑइल का बना हुआ खाना खाकर आप अपने बालों का गिरना कम कर सकते है।



चावल की भूसी का तेल स्वास्थ्य त्वचा के लिए


राइस ब्रैन ऑइल में विटामिन ई होता है जो झुर्रियां कम करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है जिससे आप अपने उम्र से अधिक जवां दिखते हैं। यह सूरज की किरणों (Sun rays) के कारण होने वाली समस्‍या को दूर करता है और स्‍किन टोन बनाए रखने में मदद करता है। जिससे आप अपने उम्र से अधिक जवां दिखते हैं।


राइस ब्रान आयल के फायदे कोलेस्ट्रोल नियंत्रण में


दुसरे खाद्य तेलों की तुलना में राइस ब्रान तेल में मोनोअनसेचुरेटेड, पॉलीअनसेचुरेटेड तथा संतृप्त वसा की मात्रा बहुत अधिक पाईं जाती हैं। राइसब्रान खाद्यतेल इन सभी वसायुक्त तत्वों का बहुत ही बढिया स्रोत है। Rice bran Oil में इन तीनों fatty acids का समावेश होने की वजह से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है जिसकी वजह से दिल के दौरे और स्ट्रोक को कम करने में मदद मिलती है

राइस ब्रान आयल है लिवर के लिये फायदेमंद – 

राइस ब्रैन ऑयल में लीवर को मजबूती प्रदान करने वाले विटामिनस और प्रोटीन का समावेश होता है, जिससे लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ने में मदद मिलती है। यह एग्जिमा और फैटी लीवर रोग को भी ठीक करने में सहायक है।


राइस ब्रैनऑयल बनाएं इम्यून सिस्टम मजबूत – 

इस तेल में एंटीऑक्‍सीडेंट प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाता है। इस तेल से बना हुआ खाना खाने से शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को बेहद लाभ पहुचता है। इस तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर में उपस्थित फ्री रेडीकल्स से लड़ता है और कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता शरीर में बढ़ाता है।


राइस ब्रान आयल रोके कैंसर होने से –


राइस ब्रैन ऑयल में टोकोफेरोल्स (Tocopherols) एंड टोकोट्रीएनल (Tocotrianal) नामक पदार्थ हेाते हैं,जो फ्री रैडिकल्स से होने वाले कैंसर को रोकते है। फ्री रेडिकल्स सेलुलर चयापचय के खतरनाक उप-उत्पाद हैं जो कि स्वस्थ कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदल देते हैं। इसलिए कैंसर की संभावना नजर आये तो यह तेल जरूर अपनाएं।..


एलर्जिक तत्वों से रक्षा करता है राइस ब्रान आयल –


राइस ब्रान तेल हमारे शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण होने से सुरक्षित करता है। यह शरीर को एलर्जिक तत्वों के विरुद्ध शक्तिशाली बनाकर उनसे लड़ने की शक्ति देता है।

एलर्जी लक्षण, बचाव के तरीके और घरेलू उपचार – 
Allergy symptoms, Causes and Home treatment in Hindi
Allergy in Hindi एलर्जी तब होती है जब हमारा सरीर किसी पदार्थ के प्रति प्रतिक्रिया करता है |यह मामूली से कठिन समस्या हो सकती है |एलर्जी के बिभिन्य प्रकार होते है | इस लेख में आप जानेगे एलर्जी लक्षण, बचाव के तरीके और घरेलू उपचार के बारे में।

सबसे आम एलर्जीयां इन चीजो से होती है:

  • हवा मे मोजूद चीजे जैसे फूलो का पराग, मिटटी, पालतू पशुओं की रुसी या धूल
  • वे चीजे जिन्हें आप छूते है जैसे धातु वनस्पति दूध या रसायन
  • आप जो कुछ खाते या पीते है जैसे अंडे, मुगफली, मेवा, दूध, सोया,गेहूं या शंख मीन
  • कीड़ो के डंक, जैसे बर्र, मधुमख्की, ततैया, चीते के डंक
  • दवाएं
एलर्जी से मुक्ति नहीं मिल सकती, लेकिन इलाज से आप वेहतर महसूस कर सकते है| सबसे अच्छी योजना यह होगी की उन चीजों से बचा जाये जो आपके लक्षण को और बुरा बनाती है

एलर्जी के लक्षण क्या हैं – Symptoms Of Allergy In Hindi

allergy/एलर्जी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। एलर्जन से संपर्क की मात्रा, क्षमता और पीड़ित व्यक्ति की रोग प्रतिकार शक्ति के अनुसार यह लक्षण कम-ज्यादा हो सकते हैं।
सामान्य तौर पर देखे जानेवाले एलर्जी के लक्षणों जानकारी निचे दी गयी हैं :
1. नाक में एलर्जी – बार-बार जुखाम होना, नाक से पानी बहना या नाक कफ से जाम हो जाना, खुजली आना, छींके आना इत्यादि।
2.त्वचा मेंएलर्जी – खुजली होना, त्वचा पर लाल चट्टे, खुजली करने पर चट्टे पड़कर सूजन आना इत्यादि।
3.आँख मेंएलर्जी – आँखों में से पानी आना, खुजली होना, आँखे लाल होना इत्यादि।
4.फेफड़ो में एलर्जी – सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में कफ जम जाना, सांस लेते समय सिटी जैसा आवाज आना, घबराहट इत्यादि।
5.आहार और एलर्जी –कुछ लोगो को आहार पदार्थों से एलर्जी होती है जैसे की टमाटर, खीरा, दूध, अंडा या मछली इत्यादि। ऐसा आहार लेने पर अगर एलर्जी होती है तो गैस, उलटी, पेट दर्द, खुजली, जुलाब, त्वचा पर लाल चट्टे जैसे लक्षण नजर आते हैं।
6.सम्पूर्ण शरीर में एलर्जी –कभी-कभी किसी विशेष एलर्जन के संपर्क में आने पर अतिसंवेदन शीलता के कारण सम्पूर्ण शरीर में एलर्जी होकर घबराहट, सांस लेने में तकलीफ, चेहरे पर सूजन, खुजली जैसे लक्षण नजर आते है और पीड़ित को गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ता हैं।
7.दवा से एलर्जी –दवा से एलर्जी होने पर पीड़ित की हालत बेहद ख़राब हो सकती है और तुरंत हॉस्पिटल में दाखिल कर उपचार कराना पड़ता हैं।

एलर्जी का निदान कैसे किया जाता हैं – 

How to diagnose allergy in Hindi

ज्यादातर मामलों में एलर्जी का निदान पीड़ित की शारीरिक जांच, लक्षण और एलर्जी का इतहास  देखकर ही निदान हो जाता हैं। कुछ मामलों में अगर पीड़ित को पता नहीं चलता है की उसे किस चीज से एलर्जी हो रही हैं तो ऐसी अवस्था में पीड़ित की रक्त जांच / Blood Test की जाती हैं। रक्त जांच में शाकाहारी आहार, मांसाहारी आहार, दवा, वनस्पति, परागकण और किटक(insect) के प्रति संवेदन शीलता की जांच की जाती हैं।
रक्त जांच का रिपोर्ट आने पर जिस चीज के प्रति अतिसंवेदन शीलता पायी जाती है उस चीज से दुरी बनाने की सलाह दी जाती हैं। एलर्जी को सामान्य मानकर दुर्लक्षित करना बेहद खतरनाक हो सकता है। अगर आपको एलर्जी की समस्या है तो उसे कम करने के लिए उपाय करने चाहिए।

एलर्जी के बचाव के तरीके – Ways to Protect Allergy in Hindi

  1. सबसे पहले तो जो सामान्य चीज़े आप कर सकते है वो है घर में पालतू पशुओ और जानवरों के करीब जाने से बचे अगर आपको उनके बालों से एलर्जी ( Allergy)  है और उसके बाद घर को साफ़ सुथरा रखने के साथ साथ उपयुक्त कीटनाशकों का भी प्रयोग करें ताकि कचरे वाले मछर पैदा नहीं हो |
  2. घर में वूलन का कारपेट इस्तेमाल नहीं करें और teddybear या अन्य soft toys को साफ़ रखें  |
  3. एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं l
  4. वूलन के blanket के बजाय बाजार में मौजूद ‘एक्रिलिक’ रजाई और सिंथेटिक तकियों का इस्तेमाल करे |
  5. बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे,आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा  लगायें
  6. पालतू पशुओं को अपने लिविंग रूम से दूर ही रखें |
  7. जानवरों और पालतू पशुओं के बारे में ध्यान रखे कि उन्हें नियमित रूप से नहलाएं और उनके बाल अधिक बड़े नहीं होने दें क्योंकि उनके बालों में धुल मिटटी फंस जाने के कारण अगर आप उनके सम्पर्क में आते है तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है |
  8. घर में proper ventilation की व्यवस्था रखें |
  9. अपनी कबर्ड में सूखे और साफ़ कपडे ही रखें क्योंकि मैले या नम कपड़ों से फफूंद की समस्या हो सकती है इसलिए इसका ध्यान रखें |
  10. ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे l
  11. जब आप एलर्जी ( Allergy) के लिए टेस्ट करवा लेते है तो एक बार एलर्जी (Allergy) के कारक चिन्हित हो जाने की दशा में खानपान का विशेष ध्यान रखें अगर आप बाजार से कोई चीज़ खरीद कर खाते है पीते है तो उस पर उसमे मौजूद तत्व अंकित होते है इसलिए एक बार उनका ध्यान रखकर ही कोई चीज़ खाएं |

एलर्जी से बचाव के घरेलू उपाय – 

home remedies for Allergy Treatment in Hindi

1.नाक की एलर्जी -जिन लोगों को नाक की एलर्जी बार बार होती है उन्हें सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ समय तक लगातार लेना चाहिए इससे नाक की एलर्जी में आराम आता है ,सर्दी में घर पर बनाया हुआ या किसी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश खाना भी नासिका एवं साँस की एलर्जी से बचने में सहायता करता है आयुर्वेद की दवा सितोपलादि पाउडर एवं गिलोय पाउडर को 1-1 ग्राम की मात्रा   में सुबह शाम भूखे पेट शहद के साथ कुछ समय तक लगातार लेना भी नाक एवं श्वसन संस्थान की एलर्जी में बहुत आराम देता है
2.पानी में ताजा अदरक, सोंफ एवं पौदीना उबालकर उसे गुनगुना होने पर पीयें।, इसे आप दिन में 2-3 बार पी सकते हैं।
3.चार पत्ते तुलसी, अदरक, मिश्री, लोंग, कालीमिर्च मिलकर बनाई हुई हर्वल चाय पीने से एलर्जी मे आराम मिलता है|
4.सर्दियो मे चवनप्रास खाने से नाक और सास की एलर्जी दूर होती है|

स्किन एलर्जी से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपचार – 

home remedies for getting rid of skin allergies

ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं: पानी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है। स्किन allergy से बचने के लिए सबसे सस्ता उपाय है पानी। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर की गंदगी यूरिन के साथ बाहर निकल जाती है।
सुबह की धूप लें: सुबह की धूप त्वचा के लिए कई मायनों फायदेमंद होती है। त्वचा में allergy और फंगस जैसी समस्या सूर्य के प्रकाश से दूर होती हैं। सुबह 20 मिनट की धूप लेने की आदत बनाएं।
कॉड लिवर ऑयल व विटामिन ई: विटामिन ई ऑयल में कॉड लिवर ऑयल मिलाकर एलर्जी वाली जगह पर लगाएं और रात भर छोड़ दें। सुबह तक रैशेज में आराम मिल जाएगा।
तुलसी पत्ते का पैक: तुलसी पत्ते को पीस लें। इसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल, लहसुन की दो कलियां, एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं। इसे allergy वाली जगह पर लगाएं और थोड़ी देर बाद साफ कर लें।
नीम: एंटी बैक्टीरियल गुण का कारण स्किन की हर तरह की समस्या के निदान में नीम बहुत फायदेमंद है। एलर्जी को दूर करने के लिए नीम की पत्तियों को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगो कर पीस लें। इसको त्वचा पर लगा कर 30 मिनट तक लगाने के बाद धो लें। इसके अलावा नीम की पत्ती को पानी में उबालकर नहाने से भी फायदा मिलता है।
नीम: जिन्हे  बार बार त्वचा की allergy होती है उन्हें मार्च अप्रेल के महीने में जब नीम के पेड़ पर कच्ची कोंपलें आ रही हों उस समय 5-7 कोंपलें 2-3 कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह चबा चबा कर 15-20 दिन तक खाना  त्वचा के रोगों से बचाता है,
हल्दी: से बनी आयुर्वेद की दवा हरिद्रा खंड भी त्वचा के  रोगों में बहुत गुणकारी है इसे किसी आयुर्वेद चिकित्सक की राय से सेवन कर सकते हैं l
पपीता: पपीते में मौजूद एन्जाइम स्किन एलर्जी को दूर करने में भी मददगार होता है। allergy होने पर पपीते के गूदे को मसलकर चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट लगा रहने के बाद धो दें।

ऐसे करें एलर्जी से बचाव

  1. घर से निकलने से पहले त्वचा को अच्छी तरह ढंक लें। धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लोशन जरूर लगाएं।
  2. बाहर से आकर चेहरे को पानी से जरूर धोएं। फेसवॉश का ज्यादा इस्तेमाल न करें इससे त्वचा शुष्क होती है।
  3. जिन चीजों से एलर्जी हो उन्हें खाने से बचें। कुछ खाद्य पदार्थ एक साथ खाने से भी एलर्जी हो जाती है।
  4. फिल्टर्ड पानी का ही प्रयोग करें।
अगर इन सब तरीको को आजमाने के बाद भी यदि आपको कोई प्रश्न या चिंता हो तो अपने डॉक्टर से बात करे |

राइस ब्रान आयल दिलाये मासिक धर्म के दर्द में राहत  
महिलाओ के लिए इस चावल की भूसी के तेल के फायदे मासिक धर्म में दर्द से राहत पाने के लिए खास मने जाते है इस तेल को खाने से उनमें रक्तस्राव की मात्रा काफी कमी आती हैं तथा पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को  भी कम करने में काफी सहायता मिलती है।
राइस ब्रान आयल के नुकसान-  
  1. अत्यधिक इस्तेमालकरने से बचें: राइस ब्रैन ऑयल लगभग हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना हो सकता है आपके शरीर के लिए नुकसानदेय।
  2. इन परेशानियों में इसका सेवन ना करें: चावल की भूसी के तेल में फाइबर अधिक मात्रा में होता है जो पाचन में सुधार कर सकता है। लेकिन यदि आपको जठरांत्र से संबंधी कोई समस्या है या आप पहले से ही अल्सर जैसी कोई बीमारी से पीड़ित हैं या फिर किसी भी अन्य कारण से आपके पाचन तंत्र संकुचित होता है तो यह आपकी समस्या को और बढ़ा सकता है।
  3. सीधा सेवन करने से बचें: इसके अलावा चावल की भूसी के तेल में कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में होती हैं। इसलिए खाना पकाने में जितनी जरूरत हो उतना ही इसका उपयोग करें। इसका अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपके शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है।
ऊपर अपने जाना की किस प्रकार राइस ब्रान आयल यानि चावल की भूसी के तेल हमारे लिए कितना लाभदय होता है तो आज से ही इसे अपने खाने बनाने के तेल में सामिल करें और लाभ प्राप्त करें |

Saturday, 29 June 2019

क्या सचमुच सैनिटरी नैपकिन से हो सकता है कैंसर? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

थोड़ा सावधान हो जाएं क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि सैनिटरी नैपकिन के लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से कैंसर हो सकता है.

सैनिटरी नैपकिन

क्या सचमुच सैनिटरी नैपकिन से हो सकता है कैंसर? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

SANA IMC HERBAL

SAMTA NAGAR, TIMKI, TIN KHAMB CHOUK, NAGPUR,  9503593007, 7620187007

थोड़ा सावधान हो जाएं क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि सैनिटरी नैपकिन के लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से कैंसर हो सकता है.


नई दिल्लीः क्या हर महीने पीरियड्स के दौरान आप भी पैड्स यानि सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं? अगर हां, तो थोड़ा सावधान हो जाएं क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि सैनिटरी नैपकिन के लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से कैंसर हो सकता है.

जानिए क्या कहा जा रहा है इस मामले में-


  • पैड प्लास्टिक मैटिरियल से बनता है जिसमें बीपीए और बीपीएस जैसे कई  कैमिकल्स डाले जाते है जो फीमेल ऑर्गन को खराब कर सकता है.

  • सैनिटरी नैपकिन में फाइबर होता है जो कि सर्विकल कैंसर का कारण बन सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि सैनिटरी पैड पूरी तरह से रूई से नहीं बनते हैं. ऐसे में इन्हें बनाने के दौरान सेलूलोज़ जैल का इस्तेमाल होता है.

  • इतना ही नहीं, ये भी कहा जा रहा है कि पैड्स में डाइऑक्सिन भी होता है जिससे ओवेरियन कैंसर हो सकता है.

  • नैप्किंस को नमी एब्ज़ोर्व करने के लिए बनाया जाता है इसलिए रूई के साथ-साथ इसमें रेयोन (सेलूलोज से बनाया हुआ नकली रेशम), सिंथेटिक फाइबर भी डाला जाता है जो बहुत ही खतरनाक होते हैं.

  • इसमें पैस्टिसाईड्स और जड़ी-बूटियों को भी डाला जाता है. ऐसे में सैनिटरी नैपकिन कैंसर का कारण बन सकता है.

डॉक्टर्स की राय-
इस मामले की जांच के दौरान एबीपी न्यूज़ ने कई डॉक्टर्स से बात की. जानिए क्या कहा डॉक्टर्स ने.

एम्स की गायनोक्लोजिस्ट डिपार्टमेंट की हेड डॉ. अल्का कृपलानी का कहना है कि किसी भी तरह के कैमिकल से महिलाओं को कैंसर हो सकता है. उन्होंने बताया कि यदि किसी सैनिट्री नैपकिन की मेकिंग के दौरान कैमिकल का इस्तेमाल हुआ है तो महिलाओं को उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि कैमिकल से महिलाओं का सीधे संपर्क होता है तो उन्हें कैंसर हो सकता है. उन्होंने ये भी बताया कि कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड्स पर टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल करती हैं जो कि कैंसर का कारण बन सकता है.

मैक्स वैशाली हॉस्पिटल की गायनोक्लोजिस्ट डॉ. कनिका गुप्ता का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर सैनिटरी नैपकिन से नहीं हो सकता लेकिन सैनिटरी नैपकिन के कारण अनहाईजनिक मेडिकल कंडीशंस हो रही हैं. महिलाओं को ठीक से साफ-सफाई ना रखने के कारण इंफेक्शन हो रहा है. इससे इम्यूनिटी कम हो रही है. सीधे तौर पर कहा जाए तो यदि महिलाएं पैड्स इस्तेमाल करने के दौरान हाइजिन मेंटेन नहीं करती तो उन्हें इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है जो कि बाद में किसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है. हाइजिन में ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि सैनिटरी पैड्स कितने घंटे में बदले जा रहे हैं. नैपकिन कितना हाइजिनिकली बना है.

आईवीएफ स्पेशलिस्ट और गायनोक्लोजिस्ट डॉ. शिवानी का कहना है कि बहुत सारी चीजें कैंसर होने का कारण होती है. पॉल्यूशन, डायट और भी इसी तरह की कई चीजें. हालांकि ये रिसर्च आई है कि सैनिटरी नैपकिन जो कैमिकल से बनते हैं उनसे कैंसर होने का खतरा है. लेकिन अब बहुत से बड़े ब्रांड्स ये दावा करते हैं कि उनके बनाए सैनिटरी नैपकिंस में किसी तरह का कोई कैमिकल इस्तेमाल नहीं होता. ऐसे में आपको ऐसे सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करना चाहिए जो कैमिकल से नहीं बने.

वहीं डॉ. गुलाटी का इस बारे में कहना है कि टैल्कम पाउडर से कैंसर होता है लेकिन सैनिट्री नैपकिन को लेकर ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि इससे कैंसर होता है.

ये मैसेज भी हुआ था वायरल-
आपको बता दें कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया एक पर पोस्ट डाली गई थी और इस पोस्ट में ये कहा गया कि 56 लड़कियों की पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाले विस्पर और स्टेफ्री सैनेटरी नैपकिन के कारण डेथ हो गई. पोस्ट में चेतावनी दी गई कि दिनभर एक ही पैड इस्तेमाल ना करें क्योंकि इन अल्ट्रा नैपकिंस में कैमिकल का इस्तेमाल होता है ये कैमिकल दिनभर में लिक्विड जैल में कन्वर्ट हो जाता है जिस कारण ब्लैडर कैंसर और यूट्रस कैंसर होने का डर रहता है. पोस्ट में सलाह दी गई कि सिर्फ कॉटन से बने पैड का ही इस्तेमाल करें. साथ ही ये भी लिखा गया कि यदि आप अल्ट्रा पैड्स का इस्तेमाल करती हैं तो 5 घंटे बाद बदल लें. अगर सैनेटिरी नैपकिन नहीं बदला गया तो इसमें जमा ब्लड ग्रीन होकर फंगस बन जाता है जो कि यूट्रस के जरिए बॉडी में जाता है.

लेकिन जब एबीपी न्यूज़ ने इसकी जांच करी तो ये बात गलत निकली. एबीपी न्यूज़ ने इस बारे में मैक्स वैशाली हॉस्पिटल की गायनोक्लोजिस्ट डॉ. कनिका गुप्ता से बात की थी. उनका कहना था कि पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड्स यूज कर रहे हों और दिनभर उसे चेंज नहीं कर रहे तो जो ब्लड इकट्ठा है उससे बस 1 पर्सेंट चांस हैं कि कुछ इंफेक्शन डवलप हो जाए लेकिन ये अलग सिचुएशन हैं. सैनिटरी पैड्स के इस्तेमाल से ना तो ब्लैडर कैंसर होता है और ना ही यूट्रेस कैंसर. इतना ही नहीं, अगर कॉटन पैड्स यूज करने की बात की जा रही हैं तो उसको भी चेंज नहीं करोगे तो इंफेक्शन और बाकी चीजें तो उससे भी हो सकती हैं. ये सिर्फ डराया जा रहा है कि 56 लड़कियों की विस्पर या स्टेफ्री से मौत हो गई.

क्या कहते हैं आंकड़े-
नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 2015-16 की रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में ग्रामीण महिलाएं 48.5%, शहरों में 77.5% महिलाएं और कुल 57.6% महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं.

जांच के दौरान सैनिटरी नैपकिन नहीं पाए गए सुरक्षित-
2003 में अहमदाबाद स्थित कंज़्यूमर एजूकेशन एंड रिसर्च सेंटर ने बाजार में उपलब्ध 19 ब्रांड के सैनिटरी नैपकिन की जांच की तो इन पर ना सिर्फ डस्ट मिली बल्कि इनमें चीटियां भी पाईं गईं.

कंज़्यूमर्स की राय-
कंज़्यूमर्स का मानना है कि जब बाज़ार में प्रोडक्ट्स अधिकारिक एजेंसियों द्वारा प्रमाणित होते हैं तो वे सुरक्षित हैं. भारत में सैनिटरी पैड को जिस स्टैंडर्ड के अनुसार परीक्षण किया जाता है उनमें 1980 से कोई बदलाव नहीं किया गया है.
अगर इस स्टैंडर्ड के अनुसार जांच की जाए तो सारे सैनिटरी पैड्स पास हो जाएंगे तो इसलिए इन स्टैंडर्ड्स में बदलाव करना ज़रूरी है या इनमें और भी पैरामीटर्स डाले जाएं.

चीफ एग्ज़िक्यूटिव ऑफिसर ऑफ वेगर हाइजीन एंड मेकर ऑफ हेल्थ एंड पर्सनल केयर के जिनोज का कहना है कि हमें ऐसे पैरामीटर्स डालने होंगे जिससे यह पता चल सके कि ये प्रोडक्ट कितना सेफ हैं.


Thursday, 27 June 2019

एलोवेरा जूस के 18 फायदे

एलोवेरा जूस के 18 फायदे

SANA HERBAL DETOXE CENTER, 

SAMTA NAGAR, TIMKI, NAGPUR

7620187007


  • एलोवेरा ( एलोवेरा को घृतकुमारी भी कहते हैं ) 

  • एक छोटा सा कटीला पौधा होता है जिसकी पत्तियों में ढेर सारा तरल पदार्थ भरा होता है. इसमें कई प्रकार के प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं, इसलिए यह हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. एलोवेरा औषधीय गुणों से भरपूर होता है. एलोवेरा का नियमित इस्तेमाल करके आप फिट रह सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि एलोवेरा के क्या-क्या फायदे हैं और इसका उपयोग किस-किस तरह से किया जा सकता है.

  • एलोवेरा के फायदे और उपयोग :
  • एलोवेरा हमारे शरीर में खून की कमी को दूर करके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है.
  • एलोवेरा हमारे शरीर की अंदरूनी सफाई करता है और शरीर को रोगाणु से मुक्त रखने में मदद करता है.
    यह हमारे शरीर की नस, नाड़ियों आदि की सफाई करता है.
  • त्वचा की देखभाल और बालों की मजबूती व बालों की समस्या से निजात पाने के लिए एलोवेरा संजीवनी का काम करती है.
  • एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की नमी बरकरार रहती है. और त्वचा चमकदार दिखती है.
    यह त्वचा के लचीलेपन को बढ़ाकर त्वचा को खूबसूरत बनाता है.
  • एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, झुर्रियाँ, चेहरे के दाग-धब्बे,
    आँखों के काले घेरे दूर होते हैं.
  • एलोवेरा का उपयोग कोई भी व्यक्ति कर सकता है. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है.
    एलोवेरा जूस खून को शुद्ध करता करता है और हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है.
    यह शरीर में ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ाता है.
  • यह दिल से सम्बन्धित समस्याओं, जोड़ों के दर्द, मधुमेह, यूरिन की समस्या, शरीर में जमा
    विषैले पदार्थ आदि को खत्म करने में मददगार है.

  • इसका नियमित उपयोग करके लंबी उम्र तक स्वस्थ रहा जा सकता है.

  • हर दिन एक ग्‍लास एलोवेरा जूस पीने से वजन घट जाता है.
  • एलोवेरा जूस दांतों को साफ और रोगाणुमुक्त रखता है. एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है. एलोवेरा के जूस को मुंह में भरने से छाले और बहने वाले खून को रोका जा सकता है.
  • एलोवेरा का इस्तेमाल करने से बाल झड़ने की समस्या कम हो जाती है.
  • आप फेसवास के रूप में भी इसका उपयोग कर सकते हैं.
  • एलोवेरा के लिक्विड में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर सिर में लगाने से सिर दर्द में आराम पहुँचता है.
  • एलोवेरा का जूस हर दिन पीने से कब्ज से राहत मिलती है.
  • एलोवेरा का जूस और आँवला के जूस को मिलाकर पीने से मधुमेह में लाभ पहुँचता है.
  • फटी एड़ियों में एलोवेरा जेल लगाने से लाभ पहुँचता है.
  • एलोवेरा का जूस पीने से पीलिया में भी फायदा पहुँचता है.

सुबह उठते ही खाली पेट ऐलोवेरा पीने के है फायदे ही फायदे..

एलोवेरा का जूस, बहुत फायदेमंद होता है। इसमें कई प्रकार के प्रोटीन और विटामिन होते है जो शरीर को स्‍वस्‍थ बनाते है। इसके जूस का स्‍वाद थोड़ा कड़वा होता है लेकिन आजकल मार्केट में इसका जूस कई फ्लेवर मं मिलता है, जिससे आप आसानी से इसे स्‍वाद लेकर पी सकते है। लेकिन शायद आपको ये बात मालूम नहीं होगी कि एलोवेरा पीने से 200 तरह की बीमारियों को टाला जा सकता है, और ये सभी रोग पेट सें संबंधित होते है। एलोवेरा जूस में एंटी-ऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की अधिकांश बीमारियों को ठीक कर देते है। इसे पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिरक्षा क्षमता दोनों का ही विकास होता है। इसे पीने से शरीर में कम होने पोषक तत्‍वों की भी पूर्ति हो जाती है। एलोवेरा जूस के फायदे निम्‍मलिखित हैं :

 पेट साफ रहता है 

जब आप पानी के साथ एलोवेरा जूस पीते हैं तो आपको अपने आप ही टॉयलेट जाने की इच्‍छा होने लगती है। अगर ऐसा रोजाना करेगें तब आपके पेट का सिस्‍टम गंदगी को बाहर निकालने लगेगा और आपका पेट साफ हो जाएगा। जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत रहती है उनके लिए ये नुस्खा बेहद कारगर साबित होता है। 

डिटॉक्‍स करता है बॉडी  

 एलोवेरा जूस एक अच्‍छा डिटॉक्‍सीफिकेशन करने वाला पेय पदार्थ है। हमारे शरीर में कई प्रकार के विषैले तत्‍व होते है जो स्‍कीन को खराब कर देते है और बॉडी सिस्‍टम पर गंदा प्रभाव डालते है। पीने से आपके पेट के अंदर की हर प्रकार की गंदगी बाहर निकल जाती है । एलोवेरा जूस शरीर से हर प्रकार की गंदगी को बाहर निकाल देता है। साथ ही, आपको ताजगी का एहसास होता है। 

भूख बढ़ाता है 

जब सुबह पेट साफ नहीं हो पाता तो भूख भी नहीं लगती। ऐसे में आपके शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। अगर आप सुबह उठते ही एलोवेरा जूस पीते हैं तो आपका पेट साफ हो जाता है और इस प्रकार से आपको भूख लगने लगती है।

 सिरदर्द से छुटकारा

 अक्सर लोगों को नींद पूरी करने के बावजूद सुबह सिर दर्द महसूस होता है। हममें से काफी लोगों को ये बात नहीं मालूम होती कि कई बार हमारे शरीर के अंदर पानी की कमी ही वजह से सिर में दर्द शुरु हो जाता है। अगर आपको भी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है तो कोशिश करें कि सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पियें।

बढ़ाए मेटाबॉलिज्‍म :-

 एलोवेरा जूस पीने से मेटोबॉलिज्म को भी मजबूती मिलती है। सुबह सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस से आपके शरीर का मेटाबॉलिज्‍म 24 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि आप खाने को जल्‍द पचा सकेगें। जब खाना ठीक से पच जाता है तो शरीर अन्य समस्याओं से भी बच जाता है।

खून बढ़ता है 

सुबह सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीना आपका खून भी बढ़ाता है। दरअसल, खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से रेड ब्‍लड सेल्‍स जल्‍दी जल्‍दी बढ़ने लगते हैं। इसलिए अगर आपको खून की कमी है तो आप इसकी आदत जरूर डाल लें। 

वजन घटता है

 अगर आप ओवर वेट हैं, और वजन घटाना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीना आपकी मदद करता है। सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से शरीर से खराब ट्रांसफैट बाहार निकल कर शरीर का फैट मैटोबॉलिज्‍म बढ़ाता है। इस वजह से आपको वजन घटाने में आसानी होती है। 

त्वचा पर चमक आती है 

पहले एलोवेरा जूस पियेंगे, तो आपकी त्वचा चमकने लगेगी। इस आदत से चेहरे पर निकलने वाले कील-मुंहासे साफ हो जाएंगे। दरअसल, चेहरे की चमक का पेट के स्वास्थ्य से गहरा संबंध होता है। जब पेट ठीक रहेगा तो आपकी त्वचा स्वस्थ्य रहेगी। इससे डेंड्रफ की समस्‍या का भी अंत होता है। .


दांतों के लिए लाभकारी 

एलोवेरा जूस में एंटी - माइक्रोवाइल प्रॉपर्टी होती है जो दांतों को साफ और जर्मफ्री रखता है। एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा के जूस को मुंह में भरने से छाले और बहने वाले खून को भी रोका जा सकता है। इस प्रकार, एलोवेरा जूस, दांतों की समस्‍या के लिए लाभकारी होता है।

ओमेगा 3-6-9 फिश ऑयल कैप्सूल्स उपयोग करने के फायदे

  ओमेगा 3-6-9 Omega 3-6-9 उपयोग करने के फायदे:- 1. आई.एम.सी ओमेगा 3-6-9 के अनेक लाभ हैं और यह स्वास्थ्य के अनुकूल है।  2. यह ओमेगा फैटी एसिड...