यह लेह लद्दाख के इलाके एवं सिंधु नदी के आस-पास काँटेदार झाड़ियों में पैदा होती है जहाँ का तापमान (-35°C) से (40°C) तक हो जाता है। लेह लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी होती है लेकिन हिमालयन बेरी ऑक्सीजन से भरपूर होता है। इसके फल, जूस, बीज, पत्ते और झाड़िया तक सभी औषधीय गुण लिये हुए हैं एवं औषधीयों में इस्तेमाल किये जाते हैं।
हिमालयन बेरी अत्यधिक एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-एजिंग एवं एंटी-डीसीज है।इसे ऑक्सीजन, विटामिन्स और मिनरल्स का भण्डार कहा जाता है। इसमें विटामिन-सी का अनन्त भण्डार है। संसार भर में जितने भी फलों में विटामिन-सी पाया जाता है उनके मुकाबले हिमालयन बेरी में 4 से 100 गुणा अधिक विटामिन-सी मौजूद होता है। इसमें आँवले से भी 20 गुणा ज्यादा विटामिन-सी है।
इसमें 100 से अधिक न्यूट्रिएंटस, विटामिन-ए, बी1, बी2, सी का भण्डार, 24 मिनरल्स, 18 एमिनो-एसिड हैं।
यह हर उम्र के लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है। खिलाड़ियों, विद्यार्थियों, अधेड़ व्यक्तियों और दूध पिलाने वाली औरतों के लिए वरदान है।
यह लगभग सभी बीमारियों के लिए लाभदायक है जैसे:-
यह जुकाम के लिए रामबाण औषधि है।
मोटापा, कैंसर, लिवर, ब्लड-प्रैशर, कॉलेस्ट्रॉल, शुगर, दिल के रोगों और श्वांस रोगों में..
मानसिक, शारीरिक और यौन कमजोरी में..
इसे पीने से व्यक्ति 100 साल से ज्यादा तक जवां रह सकता है और नीरोगी जीवन जी सकता है।
उपयोग :- 10-10ml हिमालयन बेरी जूस को 250ml पानी के साथ सुबह खाली पेट और रात को खाने के बाद सेवन करें या 20ml हिमालयन बेरी जूस को 250ml पानी के साथ सिर्फ सुबह खाली पेट उपयोग करें।
नोट :- इसे किसी भी उम्र के लोगों को दिया जा सकता है और यह अन्य दवाओं के साथ मिलकर कोई साइड-इफ़ेक्ट नहीं करता।
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